आवश्यक घोषणा
मोहतरम क़ारीन!
ज़ेरे नज़र किताब “अज़ीम मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)” वसीम रिज़वी की किताब “मुहम्मद” के जवाब में लिखी गई है। इस किताब के लिखने में दीनी किताबों के अलावा वेबसाइट्स और दीगर मज़ाहिब की किताबों को भी हवाला बनाया गया है ताकि मुदल्लल, मुफस्सल और दंदन शिकन जवाब दिया जा सके।
इस किताब की तहरीर या हवाले से किसी भी मज़हब की अहानत हरगिज़ मक़सूद नहीं। दीगर मज़ाहिब की किताबों की इबारतों को सिर्फ़ बतौर मिसाल पेश किया गया है और यह बताना मक़सद है कि हर एक मज़हब के रिवाज व रसूम अलग-अलग हैं और हर एक को अपने मज़हब के रिवाज व रसूम पर चलने का हक़ हासिल है।
लिहाज़ा किसी भी इबारत को सिर्फ़ बतौर मिसाल ही तसव्वुर किया जाए। हम किसी के भी मज़हबी रसूम व रिवाज पर उंगली नहीं उठाया करते और न ही किसी को करना चाहिए।
किताबों के हवाले, तहरीर, कंपोज़िंग, तसहीह व प्रूफ रीडिंग और इशाअत व तबाअत में हत्तल इमकान कोशिश की गई है कि कोई गलती न रहने पाए। इसके बावजूद बतकाज़ाए बशरी अगर कोई गलती रह गई हो और क़ाबिले अफ़्व हो तो दरगुज़र कर दें। बसूरत-ए-दीगर हमें इत्तिला करें ताकि दूसरे एडिशन में इसकी तसहीह कर ली जाए।
तालिबे दुआ
मुहम्मद इब्राहीम आसी
जामिया क़ादरिया अशरफ़िया,
छोटा सोनापुर, मुंबई
Email: mdibrahimaasi@gmail.com